कोरिया वन मंडल- नया कार्यालय या नियमों की अनदेखी वन मंडल ग्राउंड के भीतर बने भवनों को तोड़कर नए डीएफओ कार्यालय का रास्ता साफ
Artical by Shajad Ansari
कोरिया जिले के वन मंडल कार्यालय बैकुंठपुर में एक बार फिर प्रशासनिक प्रक्रिया और निर्णयों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वन मंडल ग्राउंड के भीतर पहले से निर्मित भवनों को हाल ही में तोड़ दिया गया है और अब उसी स्थान पर नए डीएफओ कार्यालय के निर्माण की तैयारी की जा रही है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में कई ऐसे गंभीर प्रश्न हैं, जिनका उत्तर अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भवन पहले से मौजूद थे, तो उन्हें तोड़ने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
क्या वे भवन तकनीकी रूप से जर्जर घोषित किए गए थे?
यदि हाँ, तो क्या उसका संरचनात्मक (Structural) सत्यापन किसी सक्षम अभियंता से कराया गया था ?
और यदि कराया गया था, तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि तोड़े गए भवनों के भीतर कीमती निर्माण सामग्री भी मौजूद थी, जिसे बिना विधिवत खाली कराए मलबे में बदल दिया गया। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि
क्या तोड़फोड़ से पहले भवन के भीतर मौजूद सामग्री का आकलन (valuation) किया गया?
क्या शासकीय नियमों के अनुसार उस सामग्री की नीलामी या स्टॉक एंट्री की गई?
नियमों के अनुसार किसी भी शासकीय भवन को ध्वस्त करने से पहले
तकनीकी परीक्षण
सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुमति
और सामग्री प्रबंधन की स्पष्ट प्रक्रिया
अनिवार्य होती है। ऐसे में यह जानना आवश्यक हो जाता है कि क्या इन सभी औपचारिकताओं का पालन किया गया, या फिर जल्दबाज़ी में निर्णय ले लिया गया?
क्या इसके लिए भूमि उपयोग परिवर्तन (Land Use Permission) लिया गया?
क्या पर्यावरणीय या विभागीय मानकों का मूल्यांकन किया गया?फिलहाल तोड़ दिए गए भवनों का मलबा ग्राउंड में ही पड़ा हुआ है, जो न केवल प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है बल्कि सुरक्षा और स्वच्छता के लिहाज़ से भी सवाल खड़े करता है।यह पूरा मामला किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाने का नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और शासकीय जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। जनता यह जानना चाहती है किक्या नियमों का पालन हुआ या नियमों को हालात के हिसाब से मोड़ा गया?
अब देखने वाली बात यह होगी कि वन विभाग इस विषय में
तथ्य सामने रखता है
दस्तावेज़ सार्वजनिक करता है
या फिर उठते सवालों पर चुप्पी साध ली जाती है।