खदानों में हो रही मौतें और जवाबदेही का संकट: दश कुमार की मौत की जांच रिपोर्ट आज तक अधर में
Artical by Shajad Ansari
चरचा कॉलरी - खदानों में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर सरकार और कंपनियां बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से कोसों दूर है। बीते कुछ महीनों में तीन श्रमिकों की मौत खदान दुर्घटनाओं में हो चुकी है, जिनमें सबसे चर्चित मामला दश कुमार की मौत का है, जिसकी मार्च 2024 में खदान दुर्घटना में मौत हुई थी। लेकिन आज तक इस मामले में DGMS (Directorate General of Mines Safety) की जांच रिपोर्ट नहीं आई है।
DGMS, जो कि भारत में खनन क्षेत्रों में सुरक्षा की निगरानी के लिए जिम्मेदार केंद्रीय एजेंसी है, उसके द्वारा रिपोर्ट न आने से यह सवाल उठता है कि क्या सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर किसी प्रकार का प्रभाव डाला जा रहा है? सूत्रों के अनुसार SECL प्रबंधन पर आरोप है कि वह DGMS अधिकारियों को प्रभावित कर अपने दोषी अधिकारियों को बचाने की कोशिश कर रही है।
माइनिंग एक्ट और कोल माइंस रेगुलेशंस के तहत दुर्घटना की सूचना मिलते ही जांच शुरू की जानी चाहिए और एक तय प्रक्रिया के अनुसार रिपोर्ट तैयार होनी चाहिए। लेकिन दश कुमार की मौत के एक साल बाद भी रिपोर्ट न आना, पूरे जांच तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
स्थानीय लोगों और मृतक परिवारों का आरोप है कि हर बार लीपा-पोती कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है और मृतकों को केवल मुआवज़े के नाम पर चुप कराया जाता है। दोषियों पर कार्रवाई न होना श्रमिकों की जान की कीमत को बौना साबित करता है।
क्या DGMS और SECL जवाब देंगे?
इस मुद्दे पर SECL या DGMS की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अब तक सामने नहीं आई है, लेकिन मृतक के परिजन और श्रमिक यूनियनों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही रिपोर्ट सामने नहीं लाई गई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
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