चरचा कॉलरी में मौत का जाल बुन रहा एसईसीएल प्रबंधन! कोयला ट्रकों ने सड़क को बनाया कब्रगाह – प्रबंधक की चुप्पी में छुपा कौन सा खेल ?

Jul 22, 2025 - 11:30
Jul 22, 2025 - 11:30
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चरचा कॉलरी में मौत का जाल बुन रहा एसईसीएल प्रबंधन! कोयला ट्रकों ने सड़क को बनाया कब्रगाह – प्रबंधक की चुप्पी में छुपा कौन सा खेल ?

Artical by Shajad Ansari 

बिलासपुर जोन- चरचा कॉलरी में एसईसीएल प्रबंधन की लापरवाही अब सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि जानलेवा षड्यंत्र साबित हो रही है। हेलीपैड के पास चर्च मार्ग पर रोजाना ओवरलोड कोयला ट्रकों का तांडव जारी है। सड़कें टूट चुकी हैं, जगह-जगह गड्ढे जानलेवा जाल में बदल गए हैं। बारिश के मौसम में यह रास्ता मौत की सुरंग बन चुका है, लेकिन फिर भी प्रबंधक और महाप्रबंधक मूक दर्शक बने बैठे हैं।

क्या प्रबंधक जानबूझकर मौत का इंतजार कर रहे हैं?

प्रतिदिन 18 चक्कों वाले कोयला ट्रक निर्धारित क्षमता से कहीं ज्यादा ओवरलोड कोयला लेकर दौड़ रहे हैं। ये ट्रक न सिर्फ सड़क को बर्बाद कर रहे हैं बल्कि आम नागरिकों की जान को भी खतरे में डाल रहे हैं। लेकिन आश्चर्य की बात है कि प्रबंधन न तो कोई रोक लगा रहा है, न कोई वैकल्पिक व्यवस्था बना रहा है। क्या प्रबंधक को पता नहीं कि जर्जर सड़क पर भारी वाहनों का चलना मौत को दावत देना है?

जनता का दर्द, प्रबंधन की बेरुखी!

स्थानीय लोग रोज इन मौत के वाहनों के बीच से गुजरते हैं। कई बार बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग बाल-बाल बचे हैं, लेकिन प्रबंधन को इस पर कोई फर्क नहीं पड़ता। क्या नागरिकों की जान की कोई कीमत नहीं? क्या प्रबंधक सिर्फ कोयला निकालने और अपनी कुर्सी बचाने में ही व्यस्त हैं?

यह लापरवाही नहीं, हत्या की तैयारी है!

सड़क की हालत देखकर भी सुधार न करना, ओवरलोड वाहनों को रोकने के लिए कोई कदम न उठाना – यह सिर्फ ग़लती नहीं, बल्कि सोच-समझकर की गई ‘सिस्टमेटिक मर्डर’ की साजिश है। कल को अगर कोई हादसा होता है तो यह स्पष्ट रूप से प्रबंधन की सीधी जिम्मेदारी होगी।

महाप्रबंधक की चुप्पी में कौन सा रहस्य छुपा है?

महाप्रबंधक को भी इस समस्या की पूरी जानकारी है, लेकिन उनकी खामोशी बताती है कि वह जानबूझकर आंख मूंदकर बैठे हैं। आखिर क्यों इस खतरनाक हालात को नजरअंदाज किया जा रहा है? क्या प्रबंधन ऊपर से दबाव में है या फिर किसी लालच में जानबूझकर लोगों की जान खतरे में डाल रहा है?

जनता का सब्र अब जवाब दे रहा है!

स्थानीय निवासियों का कहना है –

 “क्या प्रबंधक चाहते हैं कि पहले कोई हादसा हो, किसी की जान जाए, तब कार्रवाई हो? अगर प्रबंधन अब भी नहीं जागा तो हम मजबूरन आंदोलन करेंगे।”

क्या जवाब देगा प्रबंधन?

यदि आने वाले दिनों में इस जर्जर सड़क पर किसी की जान जाती है तो क्या प्रबंधक और महाप्रबंधक अदालत में खड़े होकर जिम्मेदारी लेंगे? या हमेशा की तरह लीपापोती करके सच्चाई को दबाने की कोशिश करेंगे?

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