गणतंत्र दिवस पर तरगवा प्राथमिक शाला में आकिब बाबा ने बच्चों को संविधान, डॉ. अंबेडकर और देश के इतिहास से जोड़ते हुए रोमांचक कहानियों के माध्यम से नागरिक जिम्मेदारियों का संदेश दिया

Jan 27, 2026 - 14:59
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गणतंत्र दिवस पर तरगवा प्राथमिक शाला में आकिब बाबा ने बच्चों को संविधान, डॉ. अंबेडकर और देश के इतिहास से जोड़ते हुए रोमांचक कहानियों के माध्यम से नागरिक जिम्मेदारियों का संदेश दिया

गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर तरगवा प्राथमिक शाला में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें आकिब बाबा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर आकिब बाबा ने बच्चों को भारत के संविधान, देश के गौरवशाली इतिहास और 26 जनवरी के महत्व के बारे में सरल और रोमांचक कहानियों के माध्यम से जानकारी दी।

आकिब बाबा ने बच्चों को बताया कि भारतीय संविधान हमारे देश की आत्मा है, जो सभी नागरिकों को समान अधिकार और न्याय प्रदान करता है। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के संघर्षपूर्ण जीवन और संविधान निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान को रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया, जिससे बच्चे गहराई से प्रभावित हुए।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों को यह भी समझाया गया कि 26 जनवरी का दिन केवल उत्सव नहीं बल्कि लोकतंत्र, समानता और जिम्मेदारी का प्रतीक है। आकिब बाबा ने कहा कि देश को आगे बढ़ाने में आने वाली पीढ़ी की अहम भूमिका है और प्रत्येक बच्चे को सच्चा, ईमानदार और जिम्मेदार नागरिक बनना चाहिए।

आकिब बाबा की कहानियों और संवाद शैली से बच्चे बेहद उत्साहित नजर आए। उन्होंने उत्सुकता के साथ कई प्रश्न पूछे और यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि हमारे देश के नेताओं ने संविधान बनाने के लिए कितनी मेहनत और त्याग किया।

इस अवसर पर आकिब बाबा ने अपने संदेश में कहा कि गणतंत्र दिवस हमें संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने बच्चों से आह्वान किया कि वे शिक्षा, अनुशासन और सामाजिक मूल्यों को अपनाकर देश के विकास में योगदान दें।

उल्लेखनीय है कि आकिब बाबा द्वारा संचालित चिश्ती दरबार समाज सेवा के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। यहां प्रत्येक सप्ताह भंडारा और लंगर का आयोजन किया जाता है, जिसमें सभी धर्मों और समुदायों के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। इसके साथ ही जरूरतमंदों को कपड़े, कंबल और आवश्यक वस्तुएं निशुल्क वितरित कर मानव सेवा का संदेश दिया जाता है।

कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षा, सेवा और संविधान के मूल्यों को जोड़ने का सराहनीय प्रयास किया गया, जिसकी स्थानीय लोगों ने भी प्रशंसा की।

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