SECL कोरबा - जब न्याय बिक जाए तो मर्यादा भी बिक जाती है – भूविस्थापित महिलाओं का अर्धनग्न विद्रोह

Jul 21, 2025 - 07:07
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SECL कोरबा - जब न्याय बिक जाए तो मर्यादा भी बिक जाती है – भूविस्थापित महिलाओं का अर्धनग्न विद्रोह

Artical by Shajad Ansari 

कोरबा। कोयले के काले कारोबार और झूठे वादों के बीच भूविस्थापितों का सब्र आखिरकार टूट गया। कोरबा जिले की कुसमुंडा परियोजना में गांव की महिलाओं ने अर्धनग्न होकर एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ दहाड़ लगाई। यह सिर्फ विरोध नहीं था, बल्कि भ्रष्टाचार की गंदगी पर फेंका गया सीधा तमाचा था।

दफ्तर के भीतर गूँजे नारे – “चूड़ी पहन लो, साड़ी पहन लो, झूठे प्रबंधन मुर्दाबाद!”

प्रदर्शन की शुरुआत में महिलाएँ शांतिपूर्वक बैठी थीं, लेकिन जब अधिकारी ने उन्हें बाहर जाने की धमकी दी, तो उनका गुस्सा फट पड़ा। महिलाओं ने कहा – “हम चूड़ी पहन लेंगे अगर तुम सच में न्याय कर सकते हो। लेकिन अगर नहीं, तो हमारी लाज का क्या करेंगे?” और फिर एक-एक कर महिलाओं ने अर्धनग्न होकर प्रबंधन की नींद उड़ा दी।

भ्रष्टाचार का काला सच – फर्जी लोगों को मिली नौकरी, असली हक़दार दर-दर भटक रहे

महिलाओं ने साफ आरोप लगाया कि अधिकारी अनुपम दास ने पैसे लेकर फर्जी दस्तावेज़ पर लोगों को नौकरी दी जबकि असली भूविस्थापित आज भी बेरोज़गार हैं। यह सिर्फ एक अफसर की करतूत नहीं, बल्कि पूरे प्रबंधन की मिलीभगत है।

“कई बार प्रदर्शन किया, जेल गए, हर बार आश्वासन मिला लेकिन नतीजा सिफर। अब हमारी लाज और इज्जत दाँव पर लगाने की नौबत आ गई।” – एक प्रदर्शनकारी महिला की आंखों में आंसू और गुस्सा साफ झलक रहा था।

सीधी माँगें – नहीं मानीं तो कोरबा जलेगा

1978-88 से लंबित सभी रोजगार प्रकरणों को तत्काल निपटाया जाए।

फर्जी दस्तावेज़ों पर नौकरी पाने वालों को बर्खास्त कर उनकी सुविधाएँ जब्त की जाएं।

भूविस्थापित उम्मीदवारों को वैकल्पिक रोजगार और निकाले गए कर्मचारियों की बहाली की जाए।

पुराने आंदोलनों पर किए गए पुलिस केस वापस लिए जाएँ।

महिलाओं ने साफ कहा है कि 19 जुलाई को महाप्रबंधक सचिन पाटिल और सीएमडी का पुतला दहन किया जाएगा। यह तो बस शुरुआत है, अगर मांगें नहीं मानी गईं तो “कुसमुंडा से कोरबा तक आंदोलन की आग फैलेगी और प्रबंधन के भ्रष्टाचार की दीवारें ढह जाएंगी।”

क्या अब भी चुप बैठेगा सिस्टम?

क्या भ्रष्ट अफसर अनुपम दास और उसके जैसे लोग बच निकलेंगे?

क्या भूविस्थापितों की आवाज़ एक बार फिर पुलिस की लाठियों में दबा दी जाएगी?

या इस बार प्रबंधन को अपनी कुर्सियाँ बचाना मुश्किल होगा?

कुसमुंडा की महिलाओं का यह अर्धनग्न प्रदर्शन सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि वर्षों से चले आ रहे अन्याय की चिंगारी है। अगर यह चिंगारी भड़क गई, तो कोरबा का पूरा सिस्टम राख हो जाएगा।

अबकी बार सिर्फ आवाज़ नहीं उठेगी, भ्रष्टाचार का किला ध्वस्त होगा!”

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