बैकुंठपुर क्षेत्र के चरचा खदान में फिर हुई गंभीर दुर्घटना: प्रबंधन की लापरवाही और नेतृत्व की विफलता उजागर
Artical by Shajad Ansari
बिलासपुर जोन बैकुंठपुर/चरचा — बैकुंठपुर क्षेत्र की चरचा खदान में कल दिनांक 13 जुलाई फिर एक गंभीर हादसा हुआ, जिसमें एक विभागीय कर्मचारी कार्य के दौरान बुरी तरह से घायल हो गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घायल को तत्काल अपोलो अस्पताल बिलासपुर रेफर किया गया, जहां उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई है। लेकिन इस दुर्घटना ने एक बार फिर प्रबंधन की लापरवाही, सुरक्षा में अनदेखी और अधिकारियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अधिकारी मौन, फोन नहीं उठा रहे—क्या छुपाना चाहते हैं?
जब मीडिया ने इस हादसे पर अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, तो किसी ने भी न तो फोन उठाया और न ही स्थिति पर कोई बयान दिया। आखिर अधिकारी किस बात से घबरा रहे हैं?
क्या खदान के भीतर कुछ ऐसा हुआ है जिसे वे छुपा रहे हैं?
क्या हादसा बड़ा था इसलिए अस्पताल भेजा गया?
यह भी एक बड़ा सवाल है कि यदि यह कोई मामूली घटना होती, तो क्या घायल को अपोलो अस्पताल भेजा जाता? इससे साफ़ है कि दुर्घटना बेहद गंभीर थी, लेकिन उसे छुपाने की पूरी कोशिश की जा रही है।
प्रबंधन की विफलता, नेतृत्व पूरी तरह फेल
यह दुर्घटना महज़ एक कर्मचारी की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी की गवाही देती है। लगातार होती दुर्घटनाएं, गिरता उत्पादन, असुरक्षित माहौल—ये सब मिलकर इस बात की ओर इशारा करते हैं कि ऊपरी नेतृत्व पूरी तरह फेल हो चुका है।
> "हम खुद को खदान में असुरक्षित महसूस करते हैं," – एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा।
भारी मशीनीकरण के बावजूद न तो उत्पादन बढ़ रहा है, न ही कर्मचारियों को कोई सुविधा या सुरक्षा का भरोसा मिल रहा है।
महाप्रबंधक की कुर्सी क्यों अडिग?
सभी विफलताओं के बावजूद, महाप्रबंधक आज भी पद पर बने हुए हैं। एक ऐसे अधिकारी को, जिसकी सेवानिवृत्ति निकट है और जिन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं, पद पर बनाए रखना समझ से परे है।
क्या प्रबंधन का ढांचा इतना कमजोर हो चुका है कि गलत को हटाने की हिम्मत भी नहीं बची?
कर्मचारियों की मांग: नेतृत्व बदलिए वरना सब कुछ डूब जाएगा!
कर्मचारी स्पष्ट तौर पर कहा है कि यदि खदान क्षेत्र में सुरक्षा, उत्पादन और विकास को बचाना है, तो मौजूदा महाप्रबंधक को तुरंत हटाया जाए और एक ईमानदार, अनुभवी और दूरदर्शी अधिकारी की नियुक्ति की जाए।
जब तक नेतृत्व नहीं बदलेगा, तब तक न सुरक्षा सुनिश्चित हो पाएगी और न ही क्षेत्र का विकास संभव होगा।
यह सिर्फ एक हादसा नहीं, एक संकेत है—समय रहते चेतिए, वरना खदान में केवल कोयला ही नहीं, ज़िंदगियां भी जलती रहेंगी।
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