बैकुंठपुर क्षेत्र में डर और हादसों का दौर, दंश कुमार की मौत आज भी अनुत्तरित
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Artical by Shajad Ansari
बैकुंठपुर | 24 अप्रैल:
SECL के बैकुंठपुर क्षेत्र में खदान दुर्घटनाएं अब आम होती जा रही हैं, लेकिन चिंता की बात यह है कि इन हादसों के बाद भी जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। इलाके में चर्चा है कि जब से मौजूदा महाप्रबंधक ने पदभार संभाला है, तभी से दुर्घटनाएं बढ़ी हैं
बीते कुछ महीनों में तीन जानलेवा हादसे हो चुके हैं। मार्च 2024 में हुए हादसे में दंश कुमार की जान चली गई, लेकिन आज तक न तो घटना की सही जांच हुई और न ही कोई अधिकारी दोषी ठहराया गया। परिवार को मुआवज़ा जरूर मिला, लेकिन सच्चाई सामने लाने की कोशिश नहीं हुई।
हर बार मृतक ही बनता है दोषी
कर्मचारियों का आरोप है कि हादसे के बाद प्रबंधन और DGMS एकजुट होकर यह दिखाने में लग जाते हैं कि गलती तो मृत व्यक्ति की ही थी। असल दोषियों पर न तो ऊंगली उठती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई होती है। जो जांच होती है, वो बस कागजों में सिमट जाती है।
सुरक्षा से ज़्यादा लक्ष्य, लेकिन फिर भी अधूरे आंकड़े
यहां यह समझना जरूरी है कि सुरक्षा के साथ भी उत्पादन संभव है। बैकुंठपुर क्षेत्र में खदानों के मशीनीकरण में अच्छी-खासी तरक्की हुई है, लेकिन महाप्रबंधक की कार्यशैली ऐसी है कि ना तो सुरक्षा की गारंटी बन पाई है और ना ही उत्पादन का लक्ष्य हासिल हो पा रहा है।
चरचा की पहचान बदल दी
चरचा खदान का एक गौरवशाली इतिहास रहा है — यहां के कर्मियों को कोल इंडिया में मेहनत, सुरक्षा और उत्पादन के लिए जाना जाता था। लेकिन मौजूदा प्रबंधन के अधीन, निजी ठेकेदार प्रबंधकों और सह-क्षेत्रीय प्रबंधकों के सुरक्षा आदेशों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं। मनमानी चल रही है, जिससे दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं।
अगर पहले कार्रवाई होती, तो हादसे टल सकते थे
कर्मचारियों का मानना है कि अगर बीते हादसों की सही तरीके से जांच होती और जो वाकई दोषी हैं उन्हें सजा मिलती, तो बाकी लोग भी सतर्क रहते और आगे ऐसी घटनाएं न होतीं। लेकिन जब गलतियों पर पर्दा डाल दिया जाता है, तो सुधार की कोई गुंजाइश ही नहीं बचती।
अब उठ रही है मांग: निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार हटाए जाएं
श्रमिक संगठनों की मांग है कि सभी हादसों की निष्पक्ष जांच करवाई जाए, DGMS की भूमिका को भी देखा जाए, और जिनकी लापरवाही से बार-बार जानें जा रही हैं, उन्हें पद से हटाया जाए। दंश कुमार जैसे पुराने मामलों को भी फिर से खोला जाए, ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।
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