चरचा नगर पालिका – क्या खुद के भाजपा पार्षद ही अपने नगर पालिका अध्यक्ष पर लगा रहे हैं भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप?

चरचा नगर पालिका – क्या खुद के भाजपा पार्षद ही अपने नगर पालिका अध्यक्ष पर लगा रहे हैं भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप?

Artical by Shajad Ansari 

शिवपुर/चरचा।

नगर पालिका शिवपुर में भ्रष्टाचार का मुद्दा अब तूफ़ान बन चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार यह आरोप किसी विपक्षी नेता ने नहीं बल्कि भाजपा के ही एक पार्षद प्रदीप तिवारी ने अपने कार्यवाहक अध्यक्ष अरुण जायसवाल पर लगाए हैं।

ब्लीचिंग पाउडर खरीदी पर गंभीर सवाल

पार्षद ने नगर पालिका द्वारा खरीदे गए ब्लीचिंग पाउडर को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं उनका कहना है कि खरीदा गया ब्लीचिंग पाउडर बिल्कुल घटिया गुणवत्ता का है उसमें सुगंध तक नहीं है, जबकि फाइलों में महंगे दाम दर्शाए गए हैं यह सब जनता के टैक्स के पैसे की  हैपाउडर की सप्लाई और पेमेंट में भारी गड़बड़ी की गई है।

अध्यक्ष की चुप्पी – क्या यह स्वीकृति है?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि –

क्या नगर पालिका अध्यक्ष अरुण जायसवाल इन आरोपों का जवाब देंगे?

 क्या उन्होंने सच में भ्रष्टाचार किया है या यह सिर्फ राजनीतिक खेल है?

 आखिर पार्षद ने यह आवाज़ क्यों उठाई – क्या वाकई कुछ बड़ा छिपाया जा रहा है?

नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर आरोप

पार्षद ने नगर पालिका प्रशासन पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि –

हर टेंडर और खरीदी में एक ही ठेकेदार को फायदा पहुंचाया जाता है।

नगर पालिका के अफसर और अध्यक्ष मिलीभगत से काम कर रहे हैं।

सफाई व्यवस्था और अन्य कामों के नाम पर कागज़ों पर काम, लेकिन ज़मीन पर नाकामी है।

लाइव वीडियो में पार्षद का चूतिया जैसे शब्दों का उपयोग – “जनता को चूतिया बना रहे हैं” 

पार्षद ने सिर्फ आरोप ही नहीं लगाए बल्कि सोशल मीडिया पर लाइव आकर कड़ा बयान भी दिया। लाइव वीडियो में पार्षद ने कहा कि “वर्तमान अध्यक्ष जनता को चूतिया बना रहे हैं।” यह बयान न सिर्फ बेहद तीखा है बल्कि गंभीर सवाल भी खड़ा करता है कि आखिर जनता को गुमराह करने का आरोप क्यों लगा? इस टिप्पणी ने मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है और अब यह देखना होगा कि इस पर नगर पालिका अध्यक्ष क्या सफाई देते हैं।

भाजपा के लिए दोहरी मुसीबत

यह पूरा मामला भाजपा के लिए दोहरी परेशानी बन गया है।

अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो पार्टी की छवि पर गंभीर दाग लगेगा।

अगर आरोप गलत साबित होते हैं, तो अपने ही पार्षद पार्टी की बदनामी का कारण बनेंगे।

अब नज़रें इस पर हैं कि

क्या भाजपा अपने ही अध्यक्ष के खिलाफ जांच बैठाएगी?

क्या पार्षद के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी?

या फिर अध्यक्ष को बचाने की कोशिश की जाएगी और मामले को दबा दिया जाएगा?

सबकी निगाहें अब सीधे नगर पालिका अध्यक्ष अरुण जायसवाल के जवाब पर टिक गई हैं।