मनेंद्रगढ़ में लोकतंत्र पर हमला – चौथे स्तंभ की गिरेबान पर पुलिस के हाथ
Article by Shajad Ansari
थाने में पत्रकारों को पीटा, गिरेबान पकड़कर किया अपमान क्या अब पत्रकारिता करना अपराध है?
मनेंद्रगढ़। जिला MCB
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर पुलिसिया जुल्म का ऐसा नंगा नाच शायद ही पहले कभी देखा गया हो। मनेंद्रगढ़ सिटी कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज करवाने पहुंचे पत्रकार महेंद्र शुक्ला और सत्येंद्र गुप्ता के साथ पुलिसकर्मियों ने जिस तरह का गुंडागर्दी भरा व्यवहार किया, उसने पूरे पत्रकार समाज को झकझोर कर रख दिया है।
थाने में पदस्थ मुंशी लाल सिंह पवार ने पत्रकार महेंद्र शुक्ला का गिरेबान पकड़कर धक्का दिया, अपमानित किया और दबंगई दिखाई। थाने की चारदीवारी के अंदर यह दृश्य किसी लोकतांत्रिक देश का नहीं बल्कि किसी तानाशाही हुकूमत का लग रहा था।
सवाल उठता है –
क्या अब पत्रकारिता करना अपराध है?
क्या सच लिखना पुलिस को बर्दाश्त नहीं?
अगर पत्रकारों को थाने में पीटा जाएगा, तो आम जनता का क्या होगा?
सोचने वाली बात है कि यह वही पत्रकार हैं जो जनता की आवाज उठाते हैं, भ्रष्टाचार का सच सामने लाते हैं और प्रशासन की गलतियों को उजागर करते हैं। और आज वही पत्रकार, जिनके बल पर लोकतंत्र सांस लेता है, थाने में पुलिस की दबंगई का शिकार हो रहे हैं।
यह सिर्फ दो पत्रकारों का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे लोकतंत्र की जुबान दबाने की साजिश है।
आज गिरेबान पत्रकारों का पकड़ा गया है, कल आम जनता की गर्दन दबाई जाएगी।
यह घटना लोकतंत्र पर हमला है। यह पत्रकारिता का गला घोंटने की शर्मनाक कोशिश है।
अगर सरकार और प्रशासन इस गुंडागर्दी पर आंख मूंदे बैठा रहा, तो आने वाले समय में पुलिस का आतंक आम जनता पर और खतरनाक तरीके से टूटेगा।
अब वक्त आ गया है कि प्रशासन इस मामले में तुरंत कार्रवाई करे। दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर जेल भेजा जाए।
अगर ऐसा नहीं होता तो यह माना जाएगा कि सरकार भी पुलिस की गुंडागर्दी में शामिल है।
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