नगर पालिका चरचा में सुशासन तिहार बना फर्जीवाड़े का अड्डा? समस्या नाली निर्माण की, समाधान में लिख दिया गया नाली सफाई!
Artical by Shajad Ansari
शिवपुर/चरचा – छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार का उद्देश्य था कि आम जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनकर उनका त्वरित और प्रभावी समाधान किया जाए, परंतु नगर पालिका चरचा में यह योजना अब सवालों के घेरे में आ गई है। एक ओर सरकार जनता से वादा करती है कि उनकी शिकायतों को प्राथमिकता से निपटाया जाएगा, तो दूसरी ओर स्थानीय अधिकारी शिकायतों का न केवल गलत समाधान कर रहे हैं बल्कि फर्जीवाड़े का भी सहारा ले रहे हैं।
वार्ड नंबर 10 निवासी शमीम ने नगर पालिका चरचा के समक्ष सुशासन तिहार के दौरान आवेदन प्रस्तुत किया था। उनका स्पष्ट आरोप है कि उनके मोहल्ले में नाली का निर्माण पूरी तरह गलत तरीके से किया गया है। उन्होंने बताया कि जैसे ही बरसात होती है, वहां बनी खराब नाली की वजह से आसपास के 5-7 घरों में पानी भर जाता है। इससे लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं।
शमीम ने यह समस्या पहली बार नहीं उठाई। उन्होंने वर्ष 2023 में भी दो बार मुख्य नगर पालिका अधिकारी को लिखित शिकायत देकर इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान दिलाया था। लेकिन दुर्भाग्यवश कोई समाधान नहीं हुआ। अंततः उन्होंने उम्मीद लगाकर सुशासन तिहार के तहत पुनः आवेदन किया, ताकि इस बार समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
लेकिन हैरानी तब हुई जब आवेदक को बताया गया कि उनकी समस्या का समाधान कर दिया गया है और नाली की सफाई हो चुकी है। जब शमीम ने इसकी हकीकत जानी तो पाया कि न तो नाली की सफाई हुई थी और न ही किसी प्रकार का कार्य स्थल पर किया गया था। समस्या थी गलत तरीके से बनी नाली को दुरुस्त करने की, और जवाब में लिख दिया गया कि नाली सफाई कर दी गई है!
यह कागजी खेल क्या एक सुनियोजित फर्जीवाड़ा नहीं है? क्या नगर पालिका चरचा के अधिकारी इतने दबाव में हैं कि वे आवेदन पढ़े बिना ही उनका समाधान “दिखा” रहे हैं? या फिर यह भ्रष्टाचार की एक झलक है, जहां जनता की समस्याओं को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?
शमीम का सवाल वाजिब है — अगर अधिकारी वास्तव में संवेदनशील होते और जनता की समस्या को हल करने में रुचि रखते, तो इस प्रकार की गैर जिम्मेदाराना और भ्रामक रिपोर्टिंग नहीं होती। क्या सुशासन तिहार की यह हकीकत है — जहां "समाधान" केवल फाइलों में होता है, ज़मीन पर नहीं?
इस मामले ने नगर पालिका चरचा की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन को चाहिए कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि जनता का विश्वास बहाल हो सके और सुशासन तिहार केवल एक ‘औपचारिकता’ बनकर न रह जाए।
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