चरचा नगर पालिका: धर्म के नाम पर राजनीति का घमासान, सोशल मीडिया पर मचा संग्राम
Artical by Shajad Ansari
चरचा नगर पालिका में धर्म और राजनीति को लेकर बीते 24 घंटों में सोशल मीडिया पर जबरदस्त संग्राम छिड़ गया है। सावन सोमवार के पावन अवसर पर बद्रीनाथ मंदिर में पानी के टैंकर और रसीद को लेकर दो नेताओं के बीच तकरार ने तूल पकड़ लिया है।
मामला शुरू हुआ तब, जब नगर पालिका से जुड़े नेता रविश गुप्ता ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर सवाल उठाया कि "जब बद्री मंदिर में सुबह 9:30 बजे ही पानी का टैंकर पहुंच गया था, तो 11:45 बजे दोबारा किसी दूसरे व्यक्ति को भेजकर ₹500 की रसीद कटवाने की क्या जरूरत थी? यह सीधी-सीधी घटिया राजनीति है, जो समझ से परे है।"
इसके जवाब में विपक्षी नेता भूपेंद्र यादव ने पलटवार करते हुए लिखा कि "अध्यक्ष महोदय ने धार्मिक आयोजन में भी राजनीति का जहर घोल दिया। अपनी अहंकारी सोच से धार्मिक कार्यक्रम में भी ₹500 की रसीद काटी गई। लेकिन जनता आने वाले समय में इस सोच को सबक सिखाएगी।"
इस बयानबाजी के बाद से चरचा नगर पालिका का माहौल गर्म है। दोनों पक्षों के समर्थक सोशल मीडिया पर खुलकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि सावन जैसे पवित्र महीने और मंदिर जैसे आस्था के स्थल पर राजनीति का दखल कहीं से भी सही नहीं ठहराया जा सकता।
स्थानीय लोग सवाल कर रहे हैं—क्या अब आस्था भी राजनीति का मोहरा बन रही है?
पानी का टैंकर भेजने जैसे सेवा भाव को भी अगर रसीद और राजनीति में तोला जाने लगे, तो धर्म और समाज सेवा का असली मतलब क्या रह जाएगा?
दूसरी तरफ कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि नगर पालिका के अंदरुनी राजनीति का यह नया तरीका है, जिसमें एक-दूसरे की छवि खराब करने के लिए छोटे-छोटे मुद्दों को बड़ा बनाया जा रहा है।
यह पहली बार नहीं है जब नगर पालिका में धर्म के नाम पर राजनीति हुई हो। पहले भी कई धार्मिक आयोजनों पर राजनीतिक दखल की चर्चा होती रही है, लेकिन इस बार मामला सीधे सोशल मीडिया पर उछलने से तूल पकड़ गया है।
आखिर कब तक धर्म और आस्था के नाम पर इस तरह की बयानबाजी होती रहेगी? कौन सही है और कौन गलत, यह कहना अभी मुश्किल है, लेकिन इतना तय है कि नगर पालिका की राजनीति ने धर्म को भी अपने घेरे में ले लिया है।
आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराएगा या जनता सच्चाई को समझकर अपना फैसला सुनाएगी, यह देखना दिलचस्प होगा।
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