अंगद का पैर बनकर बैठे हैं बैकुंठपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक
Article by Shajad Ansari
बैकुंठपुर, छत्तीसगढ़।**
बैकुंठपुर क्षेत्र में पदस्थ वर्तमान महाप्रबंधक श्री बी.एन. झा का कार्यकाल अब विवादों और विफलताओं की एक लंबी श्रृंखला बनता जा रहा है। जबसे उन्होंने कार्यभार संभाला है, क्षेत्र में समस्याओं का अंबार लग गया है। चाहे सुरक्षा व्यवस्था हो, उत्पादन लक्ष्य, प्रशासनिक तालमेल या कर्मचारी हित—हर मोर्चे पर लगातार असफलता देखने को मिल रही है।
कर्मचारी संगठन और स्थानीय नागरिकों के अनुसार, श्री झा की कार्यशैली पूरी तरह से तानाशाहीपूर्ण और अव्यवहारिक रही है, जिससे न केवल कार्यस्थल का माहौल प्रभावित हुआ है, बल्कि क्षेत्र की प्रगति भी थम गई है। आये दिन होने वाली दुर्घटनाएँ, गिरता उत्पादन स्तर और प्रशासन के साथ बिगड़ते संबंध इस बात के प्रमाण हैं कि क्षेत्र एक गंभीर नेतृत्व संकट से जूझ रहा है।
SECL के शीर्ष प्रबंधन ने बैकुंठपुर क्षेत्र को घाटे से उबारने के लिए मशीनीकरण एवं अन्य तकनीकी उपायों में भारी निवेश किया था। लेकिन इन सब प्रयासों के बावजूद क्षेत्र की स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है। उल्टा, क्षेत्र का खर्च कई गुना बढ़ गया है, जबकि उत्पादन और कार्यप्रणाली में लगातार गिरावट आई है।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब झिलमिली क्षेत्र के ग्रामीणों के साथ महाप्रबंधक की टकरावपूर्ण नीति सामने आई। ग्रामीण, जो पिछले 35 वर्षों से भूमि अधिग्रहण को लेकर शांतिपूर्वक संघर्षरत थे, उनके खिलाफ प्रबंधन द्वारा झूठे आरोप लगाकर प्राथमिकी दर्ज करवाई गई। न्यायालय ने इस मामले में प्रबंधन की भूमिका को गलत ठहराया, जिससे क्षेत्र में असंतोष और भी बढ़ गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि महाप्रबंधक अब अपने सेवानिवृत्ति तक पद पर बने रहने की व्यवस्था कर चुके हैं, और शीर्ष प्रबंधन की चुप्पी यह संकेत देती है कि शायद अब प्राथमिकता सुरक्षा, उत्पादन और विकास नहीं, बल्कि कुछ और ही है जिसमें श्री झा निपुण हैं।
यदि समय रहते SECL का शीर्ष नेतृत्व इस गंभीर स्थिति पर ध्यान नहीं देता, तो आने वाले समय में क्षेत्र में आक्रोश और आंदोलन की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।
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