चार दिन पहले लगी थी नौकरी, खदान में हुई मौत दिगेश्वर सिंह की संदिग्ध ट्रेनिंग और चरचा कालरी वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
Artical by Shajad Ansari
चरचा कॉलरी, 26 अप्रैल।
SECL चरचा भूमिगत खदान में कार्यरत ठेका मजदूर दिगेश्वर सिंह की 22 अप्रैल 2025 को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, वह JMS कंपनी के माध्यम से महज़ चार दिन पहले 18 अप्रैल को नौकरी पर नियुक्त हुआ था। इस घटना के बाद दिगेश्वर की ट्रेनिंग प्रक्रिया और नियुक्ति को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, दिगेश्वर सिंह को जो प्रशिक्षण दिया गया था, वह केवल औपचारिकता निभाने के लिए था। विश्वस्त जानकारी के अनुसार, चरचा कालरी स्थित वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर में व्यावसायिक प्रशिक्षण के नाम पर भारी भ्रष्टाचार फैला हुआ है। बताया जा रहा है कि यहाँ प्रशिक्षुओं से पैसे लेकर उन्हें छुट्टी दे दी जाती है और खानापूर्ति करते हुए प्रशिक्षण प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाता है।
इतना ही नहीं, जिन मजदूरों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती है और वे पैसे नहीं दे पाते, उनसे प्रशिक्षण केंद्र के अधिकारी अपने निजी घरेलू कार्य कराते हैं। इससे स्पष्ट है कि ऐसे मजदूरों को आवश्यक सुरक्षा प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी नहीं मिल पाती, जिससे भविष्य में उनकी जान को खतरा बना रहता है।
दिगेश्वर की मौत के बाद इस पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। सामाजिक संगठनों और मजदूर यूनियनों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि दिगेश्वर को समुचित प्रशिक्षण मिला होता, तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।
प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस मामले में प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है और वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर की कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में आ गई है।
इस घटना ने एक बार फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मजदूरों की ज़िंदगी इतनी सस्ती है कि उन्हें बिना उचित प्रशिक्षण के खतरनाक कामों में लगा दिया जाता है? और क्या प्रशिक्षण केंद्र वास्तव में प्रशिक्षित करने के बजाय केवल प्रमाणपत्र बेचने का अड्डा बन गए हैं?
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