कोयला खदान दुर्घटना में मृत मजदूर को मिला न्याय, पत्रकार के संघर्ष और हाईकोर्ट के आदेश के बाद टूटा प्रबंधन का घमंड — लेकिन पत्रकार के पिता बने प्रतिशोध का शिकार

May 10, 2025 - 14:51
May 10, 2025 - 15:01
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कोयला खदान दुर्घटना में मृत मजदूर को मिला न्याय, पत्रकार के संघर्ष और हाईकोर्ट के आदेश के बाद टूटा प्रबंधन का घमंड — लेकिन पत्रकार के पिता बने प्रतिशोध का शिकार

चरचा कॉलरी, 10 मई 2025

दिनांक 22 अप्रैल 2025 को एसईसीएल के बैकुंठपुर क्षेत्र के चरचा में एक गंभीर हादसा हुआ, जिसमें ठेकेदारी मजदूर दिगेश्वर सिंह की दुखद मृत्यु हो गई। इस दर्दनाक घटना के बाद मृतक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, वहीं न्याय और मुआवजे के लिए संघर्ष का सिलसिला शुरू हुआ।

इस मामले को स्थानीय पत्रकार शहजाद अंसारी ने प्रमुखता से उठाया। उन्होंने प्रबंधन पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और मृतक के परिजनों को मुआवजा देने के लिए लगातार दबाव बनाया। शुरूआत में प्रबंधन इस मामले में टालमटोल करता रहा, लेकिन शहजाद अंसारी अपने रुख पर डटे रहे।

आखिरकार संघर्ष रंग लाया और प्रबंधन ने झुकते हुए ₹15 लाख का मुआवजा तत्काल दिगेश्वर सिंह के परिजनों को प्रदान किया। हालांकि इस निर्णय से मृतक परिवार को राहत मिली, लेकिन यह पत्रकार शहजाद अंसारी के परिवार के लिए एक नई मुसीबत का कारण बन गया।

महाप्रबंधक की प्रतिशोध की कार्यवाही

सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण से नाराज़ बैकुंठपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक ने पत्रकार के पिता हमीद,जो कि एक सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं, के आवास की बिजली और पानी की आपूर्ति कटवा दी। यह कार्यवाही स्पष्ट रूप से प्रतिशोध की भावना से प्रेरित मानी जा रही है।

प्रशासन रहा मौन, न्यायालय ने दी राहत

अपने साथ हुए इस अन्याय के खिलाफ हमीद ने सबसे पहले स्थानीय श्रम प्रतिनिधियों से संपर्क किया, फिर थाना, कलेक्टर एवं जिला पुलिस अधीक्षक को भी सूचना दी, लेकिन कहीं से कोई राहत नहीं मिली। जब सभी दरवाजे बंद हो गए, तब हमीद, ने बिलासपुर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

उच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता को समझते हुए सुनवाई के दौरान ही एक घंटे के भीतर बिजली और पानी की आपूर्ति बहाल करने का आदेश जारी किया। कोर्ट के इस आदेश के बाद ही एसईसीएल प्रबंधन ने बैकुंठपुर क्षेत्र के चरचा में हमीद के आवास पर बिजली और पानी की आपूर्ति को दोबारा जोड़ दिया।

जनता में आक्रोश, उठी निष्पक्ष जांच की मांग

इस पूरी घटना से आमजनता में भारी आक्रोश है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने कहा कि एक पत्रकार, जो जनहित में आवाज उठा रहा है, उसके परिवार को प्रताड़ित करना न केवल अमानवीय है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है। लोगों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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