चरचा नगर पालिका - एक खबर से हिला सिस्टम! अधूरा पार्क कुछ दिन चला—फिर उसी लापरवाही की गिरफ्त में फंसा!
Artical by Shajad Ansari
चरचा। विशेष रिपोर्ट।
क्या चरचा नगर पालिका को हर बार जगाने के लिए एक जोरदार खबर की जरूरत होगी? क्या शासन की करोड़ों की राशि यूं ही ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी? वार्ड नंबर 6 में स्थित सौंदर्य पार्क की यही हकीकत है।
कुछ महीने पहले प्रकाशित एक खबर ने हलचल मचा दी थी। उस खबर में साफ लिखा गया था कि लाखों रुपये खर्च करके बनाए जा रहे सौंदर्य पार्क को नगरपालिका ने अधूरा छोड़ दिया है और वह पार्क अब कचरे के ढेर में तब्दील हो चुका है। जनता की आह और मीडिया की चोट ने प्रशासन को जगाया—काम तुरंत शुरू हुआ, लेकिन… सिर्फ कुछ दिनों तक!
फिर वही लापरवाही, फिर वही सुस्ती!
काम शुरू होते ही उम्मीदें जगीं। परंतु अफसोस! कुछ ही दिनों में कार्य की रफ्तार फिर थम गई। अब पार्क फिर से वीरान पड़ा है, न कोई कामगार, न कोई निरीक्षण, न कोई जवाबदेही।
क्या यही है शासन की योजनाओं का हश्र?
क्या हर बार जनता को खबरों के जरिए अधिकारियों को नींद से जगाना होगा?
भ्रष्टाचार की बू और जनता का सवाल:
करोड़ों की योजना और फिर भी अधूरी स्थिति?
क्या हर निर्माण कार्य को मीडिया से ठेलकर पूरा करवाना पड़ेगा?
क्या सौंदर्य पार्क फिर से कचरे का अड्डा बन जाएगा?
स्थानीय नागरिकों का कहना है,
> “एक बार खबर छपी तो अधिकारी हरकत में आए, पर फिर से सुस्ती छा गई। क्या यही विकास का तरीका है?”
अब सवाल साफ है:
क्या यह कार्य अब तेजी पकड़ेगा या फिर से रुक जाएगा?
क्या जनता को हर बार आवाज़ उठानी पड़ेगी ताकि काम पूरा हो?
क्या सौंदर्य पार्क आम जनों को मिलेगा या फिर यह एक और भ्रष्टाचार का स्मारक बनकर रह जाएगा?
नगर पालिका से जनता का सीधा सवाल है — योजना पूरी करो या जिम्मेदारी लो!
अब देखना यह है कि यह सौंदर्य पार्क सुंदरता की मिसाल बनता है या फिर कचरे की पहचान।
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