चरचा-मैगजीन ग्राउंड बना कचरा डंपिंग ज़ोन!" क्या बच्चों की सेहत से खिलवाड़ ही है नगर पालिका की 'क्लीन सिटी मिशन'?
Artical by Shajad Ansari
चरचा नगर पालिका की लापरवाही का सबसे बड़ा सबूत – शहर का कचरा बच्चों के खेलने के मैदान के पास डंप!
मैगजीन ग्राउंड, जहां बच्चों की हंसी गूंजनी चाहिए, वहां आज बदबू, गंदगी और बीमारी का साया मंडरा रहा है। यह वही ग्राउंड है जहां सुबह-शाम बच्चे खेलते हैं, युवा व्यायाम करते हैं और बुज़ुर्ग टहलते हैं – लेकिन अब यह मैदान बना दिया गया है नगर पालिका का अस्थायी कचरा डंपिंग यार्ड।
क्या यही है ‘स्वच्छ भारत मिशन’ की हकीकत?
क्या क्लीन सिटी के नाम पर सिर्फ स्लोगनबाज़ी हो रही है?
प्रश्न उठता है – मुख्य नगर पालिका अधिकारी क्या कर रहे हैं?
क्या उन्हें यह नहीं दिखता कि महीनों से एक ही जगह पर कचरा ढेर किया जा रहा है?
क्या उन्हें इस बात की फिक्र नहीं कि बच्चों की सेहत पर इसका कितना बुरा असर हो सकता है?
यह महज लापरवाही नहीं, यह बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खुला खिलवाड़ है।
कचरे से उठती बदबू, मच्छर, मक्खियाँ, संक्रामक रोग – क्या प्रशासन को यह सब दिखाई नहीं देता?
इस भयानक लापरवाही की जवाबदेही कौन लेगा?
क्या मुख्य नगर पालिका अधिकारी को यह बताना चाहिए कि–
किस आदेश के तहत खेल मैदान के पास कचरा डंप हो रहा है?
क्या शहर में कोई तयशुदा डंपिंग ज़ोन नहीं है?
बच्चों की सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों की अनदेखी क्यों?
जहां खेलना चाहिए, वहां बीमारी फैलाई जा रही है। क्या यही है स्मार्ट सिटी का मॉडल?”
मुख्य नगर पालिका अधिकारी की भूमिका संदेह के घेरे में है।
इतने लंबे समय से ग्राउंड के पास कचरा डंप हो रहा है, और अधिकारी मौन हैं। ना कोई निरीक्षण, ना कोई सफाई अभियान, और ना ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था – क्या यह सीधे-सीधे मिलीभगत का संकेत नहीं है?
यह चुप्पी केवल अनदेखी नहीं है, यह कर्तव्य की हत्या है।
शहर के बीचोंबीच कचरे का अंबार लगाना, वह भी बच्चों के खेलने की जगह के बगल में, शहरी योजना की सबसे निचली स्थिति को दर्शाता है। क्या अधिकारियों को सिर्फ कुर्सी की चिंता है, ज़मीन पर काम की नहीं?
यदि कचरे को हटाने का ठेका दिया गया था, तो उसकी निगरानी क्यों नहीं की गई? यदि नहीं दिया गया, तो क्या नगर पालिका खुद ही गंदगी फैलाने में भागीदार बन चुकी है?
स्वास्थ्य विभाग और पर्यावरण विभाग तक भी यह मामला पहुंचना चाहिए, क्योंकि अब यह एक सामूहिक स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है।
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